अफसर बेटों की ये माँ आखिर क्यों बनाती है पहाड़ी नमकीन ?

पिथौरागढ़ से आज हम आपके लिए लाए हैं सफलता और मेहनत की जीती जागती कहानी देवकी देवी की …. लगभग 55 साल की देवकी के माथे में तेज दिमाग में रोजाना नए प्रयोगों के साथ पोसिटिव सोच ने उन्हें अब तक जवान बनाये रखा है।

दरअसल देवकी देवी ने नमकीन का कारोबार शुरू किया था जिनमें पहाड़ी दाल, मडुवा, झिंगोरा, राजमा से तरह-तरह की स्वास्थ्यवर्धक नमकीन तैयार करती हैं। देवकी देवी बताती हैं कि जब उनका मकान, होटल रेस्तरां एक बुरे दौर में हालात की भेंट चढ़ गया तब उन्होंने सर पकड़ के बैठने की बजाय अपने हुनर के माध्यम से अपने आने वाले कल की नींव रखी।
पति के साथ घर पर नमकीन बनाना शुरू किया और उस स्वाद को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की सोची इस बीच परिवार का कुनबा बढ़ा और चार बेटों ने पढ़ाई के साथ साथ माता-पिता का हाँथ नमकीन बनाने में भी चलने लगा …

धीरे-धीरे हालात बदलने लगे और देश में आयोजित होने वाली प्रत्येक सांस्कृतिक गतिविधियों जहां उन्हें अपना स्टाल लगाने का मौका मिलता उन्हें हाथ से निकलने नहीं देती। मेहनत रंग लाई और यू पी ए सरकार में उन्हें नेशनल माइक्रो इंटरप्रेनुएर अवार्ड से सम्मानित भी किया गया था । इसके बाद देवकी में नई ऊर्जा का संचार हुआ। अपनी टीम में क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को जोड़ उनका सहारा बनी। वहीं बेटों की पढ़ाई भी पूरी हो गयी और चारों बेटों ने पीएचडी पूर्ण की जिनमें तीन बेटे प्रवक्ता के पद पर तैनात हैं वही एक बेटा एयरफोर्स में सेवा दे रहा है। अब शादी के बाद बेटे और बहुएं साथ मिल नौकरी के साथ नमकीन बनाने में भी सहयोग करते हैं।

देवकी खुश हैं कि पढ़े लिखे बेटे और बहुएं उनके इस काम में साथ देते हैं। बताती हैं कि वैज्ञानिक तरीकों से नमकीन की गुणवत्ता पर ध्यान दिया तो पारंपरिक तरीकों में भी थोड़ा सुधार किया जिससे नमकीन के पोषक तत्व बरकरार रहने के साथ स्वाद भी बरकरार रहता है। अपने उत्पादों की बदौलत देवकी देवी को 2008 में नेशनल प्रोडक्शन अवार्ड मिला वहीं 2009 में तीलू रौतेली पुरष्कार से नवाजा जा चुका है। उनका कहना है कि गांव से पलायन रुके व लोग स्वरोजगार अपनाकर स्वावलंबी बने किसी के आगे हाथ फैलाने की बजाय दृढ़संकल्प के साथ अपने विचारों को बांटें जिससे एक टीम का गठन होगा और निश्चित ही धीरे मगर सपने एक न एक दिन पूर्ण जरूर होंगे।

आज जब पहाड़ से पलायन और बेरोजगारी की खबरें आम हो चली है तो ऐसे में सालों पहले शुरू की गई देवकी देवी की ये पहल आज किसी सबक से कम नहीं.…बस ज़रूरत है तो एक सकारात्मक फैसले और मजबूत हौसले की

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